dairy farm कैसे शुरू करें | dairy farming business की पूरी जानकारी 

dairy farm कैसे शुरू करें पूरी जानकारी – dairy व्यवसाय – dairy farming business कैसे शुरू करें – गाय dairy farming कैसे करें – भैस की dairy farming कैसे शुरू करें? – dairy farm कैसे बनवाए. डेयरी व्यवसाय शुरू करने मे कुल कितना खर्च आएगा? डायरी farming business मे महीने का कितना मुनाफा होता है? अच्छे नस्ल के पशु कहाँ से मिलेंगे. 

आज हम इन सभी सवालों का जवाब विस्तार से जानेंगे.

क्यों और कैसे शुरू हुई dairy farming एवं dairy plant 

ज़ब भारत मे गाँवो की संख्या शहरों से ज़ादा थी और शहरों के मुकाबले अधिकतर लोग गाँवो मे वास करते थे 

तब भारत देश के ग्रामीण क्षेत्रों मे किसान अपने और अपने परिवार के भरण पोषण की पूर्ति हेतु पशुपालन करते थे उस समय दौरान दूध को परिवार के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

लेकिन ज़ब शहरी करण तेजी से बढ़ने लगा industrial क्रांति आने लगी तो कमाई के ज़ादा आसार देखते हुए गांव से निकल कर लोग शहरों की ओर रुख करने लगे.

तो शहरों मे रह रह लोगो द्वारा दूध की एक बहुत बड़ी demand उभर कर आई जिसकी पूर्ति कर पाना असंबव था.तब पशु पालन को एक बड़े व्यवसाय के रूप मे देखा जाने लगा. और तब से शुरू किया जाने लगा डेयरी उद्योग जो गांव के किसानो को पशु पालन को व्यवसाय के रूप मे दिखाने लगे.

एक मजबूत ट्रांसपोर्ट सिस्टम बना कर ज़ब डेयरी उद्योग ने गांव गांव से किसानो से दूध खरीदना शुरू किया तो किसानो को इसमें जबरदस्त मुनाफा दिखा फिर किसानो ने पशुओ की तादाद बढा कर इसे एक व्यवसाय के रूप शुरू किया.

आज शहरों मे भी dairy फार्मिंग का व्यवसाय तेजी से प्रगति कर रहा है.आज के युवा अपनी लाखो की सैलरी छोड़ कर  इस उद्योग की तरह रुख कर रहे है।

डेरी उद्योग आज भारत में ही नहीं विदेशो तक फैला हुआ है, भारत से दूध निर्यात होता है,दूध बच्चे से लेके बूढ़े हर कोई इस्तेमाल करता है, यदि इस व्यापार को व्यापक स्तर पर किया जाये तो बहुत ही अधिक मुनाफा प्राप्त होगा।

यह उद्योग इतना आसान भी नहीं है जितना हम सोच रहे है। प्रशिक्षण बिना यह व्यापार असंभव है। कोई भी व्यापार करने से पहले उस व्यापार से जुडी सम्पूर्ण ज्ञान लेना जरुरी है.

Dairy उद्योग और dairy farming मे अंतर 

डेयरी उद्योग यानी dairy plant वो उद्योग होता है जहाँ ट्रांसपोर्टेशन की मदद से गाँवो से दूध एकत्रित कर बड़े से dairy plant तक पहुँचाया जाता है. Dairy plant मे विशाल दूध भंडारण की क्षमता होती है.

डेयरी उद्योग मे दूध की quality के आधार पर उनकी पैकेजिंग प्रोसेसिंग शुरू होती है. डेयरी उद्योग मे दूध, लस्सी दही के अलग अलग पैकेट बनाए जाते है. फिर उन पैकटो को ट्रांसपोर्ट के द्वारा demand के आधार पर अलग अलग शहरों के दुकानों तक पहुंचाया जाता है.

Dairy farming क्या होती है?

वही अगर dairy farming की बात करें तो यहां पर अधिक मात्रा मे अच्छी नस्ल के दुधारू गायों व भैसो को पाला जाता है. इन पहुओं को पालने के लिये अलग से डेयरी farming का ढांचा तैयार की जाता है जहाँ पर सही तरीके से इन पशुओं की देख रेख की जा सके.

इन पशुओं से प्राप्त दूध को डेयरी उद्योग वालों और आस पास के लोकल एरिया के लोगो को बेच कर जबरदस्त मनाफा कमाया जाता है. इसी को dairy farming कहा जाता है.

कैसे बना पशु पालन बना श्वेत क्रांति 

Dairy udyog और dairy farming को श्वेत क्रांति के नाम से भी जाना जाता है. क्योंकि इन्ही की मदद से आज दूर दराज इलाकों से दूध इकट्ठा कर शहरों के घर धर तक दूध की demand को पूरा किया जा रहा है.

इतना ही नहीं दूध से बनी अन्य खाद्य पदार्थ को भी बेच कर अच्छी इनकम कमाई जा सकती है इस व्यापार को स्वेत क्रांति के नाम से जाना जाता है। इसलिए आज विदेशो में भी निर्यात किया जाता है।

दुध और दूध से बनी पदार्थ की मांग प्रत्येक दिन और प्रत्येक स्थान पर है इसकी मांग में कभी कमी नहीं आती, एक सामान गति से चलने वाला उद्योग है। इस उद्योग का पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

 

Dairy farming से पूर्व कुछ महत्पूर्ण बातें :-

अक्सर हम आधे अधूरी जानकारी लेके व्यापार करना शुरु कर देते है उससे समय और धन दोनों की हानि ही होती है इसलिए कुछ ध्यान देने योग्य बातें  है 👇

  • सबसे पहले आप अपना बजट बना लें की आप कितना निवेश करना चाहते हों।
  • बिना प्रशिक्षण के dairy farming बिलकुल भी ना करें.
  • भले ही आपके पास कितना भी बजट हो पर शुरुआत मे पशु पालन डेयरी व्यवसाय एक छोटे से स्तर से ही शुरु करें. उसके बाद profit और demand के आधार पर ही dairy farming का विस्तार करें.
  • शुरू में आप कम ही पशुओ को ख़रीदे, बजट के पूरे पैसे पशु खरीदने में निवेश बिलकुल भी ना करें.
  • पशु खरीदते समय तुरंत निर्णय ना लें, 2 दिन मालिक और पशु के बीच का व्यवहार को देखे 
  • पशुओ का 6 मास का खाना का भी प्रबंध करें क्योकि पशु स्वस्थ होंगी तो ही ज्यादा मात्रा में दूध दे सकेंगी।
  • दूध की बिक्री ज्यादा दूर ना करें क्योकि ट्रांसपोर्ट के दौरान अधिक समय होने से दूध ख़राब हों सकता है।
  • यदि शहर से नजदीक फार्म है तो अच्छे दामों मे दूध बेचने के लिये स्वयं ही घर घर जा कर बिक्री करें, जिससे ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है 

चलिए अब जानते है डेयरी व्यवसाय – dairy farming business शुरू करने का process.

Dairy farming business कैसे शुरू करें? 

Dairy farming भारत में परंपरागत है परन्तु आसान नहीं है। निपुणता व कौशलता होना आवश्यक है.

अधूरे ज्ञान से यह व्यापार नहीं किया जा सकता है, मेहनत और सम्पूर्ण ज्ञान से इस व्यवसाय को आसान बनाय जा सकता है  चलिए dairy farming business (व्यवसाय)से जुड़े हम कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे से आपको अवगत कराते है।

  • Dairy farming business को शुरू करने व उसे चलाने के लिये अच्छे प्रशिक्षण (training) की आवश्यक है इसलिए सबसे पहले प्राक्षिण लें या कुछ समय अपने आस पास के फार्म में काम करें।
  • बारीकी से निरिक्षण करें की पशुओ को कब आहार, दवा और पानी कितनी मात्रा में दी जा रही है 
  • पशुओ की खरीदी करते समय विशेष ध्यान दे आप कौन से नस्ल की गाय लेना है उसका चयन करें।
  • कर्मचारी को नियुक्त करें जो साफ सफाई, समय पर आहार और दूध निकाले।
  • प्रत्येक गाय या भैंस द्वारा दिया जाने वाले दूध का आंकलन कर प्रतिदिन रजिस्टर में नोट करें।
  •  गायों के सेहत और स्वस्थ से सम्बंधित निरिक्षण करें।
  • दूध का संग्रह की सुविधा करें।

 

नस्लों का चयन :-

Dairy-farm

भिन्न भिन्न नस्ल की गाय की दूध देने की क्षमता भी विभिन्न है जो आप निम्न दी गयी सूची से जानकारी प्राप्त कर सकते हों

  • Mura – 20 से 25 लीटर दूध
  • Geer – 18 से 23 लीटर दूध 
  • Bharwadi – 16 से 20 लीटर दूध 
  • Jafrabadi – 10 से 12 लीटर दूध 
  • Surati- 8 से 10 लीटर दूध 
  • Mehsana – 5 से 10 लीटर दूध
  • Nagpuri – 5 से 10 लीटर दूध

 

इसके अलावा भिन्न भिन्न गायों का स्वाभाव भी अलग होता है जैसे  राठी गाय का स्वाभाव शांत होता है ज्यादा देखभाल की अवश्यकता नहीं होती है। Geer गाय का दूध में अधिक fat होता है इसलिए यह दूध महंगा बिकता है, साहिवाल गाय की बीमार नहीं पडती वही HF का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।

 

पशुओ का खुराक :-

यदि हम कितनी भी तंदुरस्त गाय लें लें यदि पशुओ को भरपूर पोषण ना मिले तो उनके विकास रुक जायेगा और उत्पादन में कमी दिखेगा, पशुओं में व्यस्क पशु, गाभिन पशु और बच्चे का आहार भी अलग अलग होता है।

समान्यातः दाना में मक्का, ज्वार, बाजरा गेहूं उपयोग किया जाता है, यह दाना की मात्रा 35% होना चाहिए,

खली जैसे की सरसों का खल, मूंगफली का खल, बिनौला की खल, अलसी की खल इनमे से किसी का भी उपयोग कर सकते हों

 चोकर में गेंहू का चोकर, चना की चूरी, दालों की चूरी, राइस ब्रेन, की मात्रा लगभग 35 किलो इनमे से उपयोग लें 

खनिज लवण की मात्रा लगभग 2 किलोनमक लगभग 1 किलो का उपयोग लें

 

स्थान का चुनाव,

यह उद्योग शुरू करने से पूर्व स्थान का चुनाव करें जहाँ पानी की भरपूर सुविधा हों क्योकि गाय और भैसों को पानी अधिक मात्रा में चाहिए था गर्मियों में पंखे की जरुरत पडती है इसलिए बिजली की सुविधा हों , हवादार गौशाला बनवाये,

 ठण्ड के लिए कमरे बनवाये सर्दियों में पशुओं को उन कमरों में रख सकें।

 

लागत और लाभ :-

इस उद्योग के लिए लागत अधिक लगता है। बेहतर हों की आपके पास पहले से पशुपालन के लिए जमीन हों तो आप पशुओ और उनके चारा पर खर्च किया जाये, भिन्न भिन्न पशुओ की कीमत अलग अलग होता है, पशुओ की कीमत उनकी दूध देने की क्षमता पर निर्भर करता है। सामान्य गाय 70000 से 1 लाख तक आएगी। थांचा तैयार करने के लिए लगभग 50000 और अन्य खर्च 10000 लगभग, कुल 2 से 2.5 लाख तक खर्च होगा।

 

लाभ :-

इस उद्योग में नुकसान ना के बराबर है क्योकि दूध की मांग में कभी कमी नहीं आती प्रतिदिन उपयोग में लिया जाने वाला पेय प्रदार्थ है। साथ ही सेहत के लिए हितकारी भी है। यदि आप शुरू में 2 गायों से व्यापार शुरू करते हों तो प्रतिदिन औसत 25 लीटर दूध का उत्पादन होता है

उदाहरण :-

        25*40₹=1000 प्रतिदिन आय

        1000*30din=30000 मासिक आय

       30000 – 10000 खर्च = 20000 नेट प्रॉफिट 

 

सावधानी :-

  • कभी कभी कुछ गायों को किसी व्यक्ति की आदत होती है इसलिए वें उनके अलावा किसी और को दूध निकालने नहीं देती यदि वह व्यक्ति ना रहे तो समस्या उत्पन्न होती है इसलिए दूध निकालने के लिए मिल्कीग मशीन का उपयोग करें
  • गाय के चारा का विशेष ध्यान दे यह आपका उद्योग पशुओं पर निर्भर है यदि वें ही अस्वस्थ रहे तो उत्पादन में प्रभाव होगा।
  • गायों को समय समय पर डॉक्टर से जाँच करवाये,
  • बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण करवाएं.
  • प्रतिकूल मौसम के लिए आहार के संग्रह की व्यवस्था करें
  • एक बात के विशेष ध्यान दे किसी कर्मचारियों द्वारा यदि दूध निकला जाता है तो उस कर्मचारी की मानसिकता पर आधार रखता है की वो कितना दूध निकल रहा यदि वो कम निकालता है तो धीरे धीरे गाय की क्षमता कम होने लगेगी।

 

सरकार द्वारा सहायता :-

नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) ने डेयरी एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट स्कीम (DEDS) द्वारा आप सरकार से सहायता प्राप्त कर सकते हों। रूरल, मार्चटाइल बैंक, और को – ऑपरेटिव बैंक में आवेदन कर सकते है। 7 लाख तक का कर्ज पर 33% सब्सिडी(अनुदान ) प्रदान होंगी।

 

सहायक उद्योग :-

डेरी उद्योग से दूध ही नहीं दही, माखन, पनीर,घी इत्यादि बनते है और यह खाद्य पदार्थो को अधिक दामों में बेचा जा सकता है, इसके अलावा पशुओं के गोबर से गोबर गैस भी उपयोग में लिया जा सकता है, गोबर से खाद बना कर भी बेचा जा सकता है।

 

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